(लोकेशन जनपद बिजनौर)

बिजनौर। गंगा के किनारे खेती करने वाले किसानों के लिए पहाड़ों पर हो रही बारिश आफत बनकर टूट पड़ी है।
इस बारिश से गंगा किनारे खेती करने वाले किसानों की सभी फसलें जलमग्न हो गई हैं।
साथ ही गंगा के उस पार गन्ने की खेती करने वाले किसान अब गंगा की धार को पार करके नाव से खेती करने के लिए गंगा के उस पार जाने के लिए मजबूर हैं।
गंगा के उस पार आने जाने वाले अस्थाई पुल भी इस गंगा के तेज बहाव में पुल का कुछ हिस्सा बह गया है।
जिसके बाद से गंगा के उस पार जाने वाले हजारों लोगों को नाव या 60 किलोमीटर घूम कर अपनी खेती करने जाना पड़ेगा।

बिजनौर के गंगा तराई क्षेत्र मंडावर इलाके में गंगा के किनारे खेती करने वाले किसान अब खासे परेशान हैं।
जिले के गंगा खादर क्षेत्र के हजारों लोगों को इस पार से उस पार पहुंचाने वाला अस्थाई पुल भी गंगा में बह गया है।
इस पुल से हजारों लोग मुजफ्फरनगर की सीमा में जाकर गंगा किनारे प्लेज़ व गन्ने की खेती किया करते थे।
इसी खेती के सहारे इन किसानों के परिवार का पेट पल रहा था।
अचानक से पहाड़ों पर हुई जोरदार बारिश से गंगा में बढ़े जलस्तर से अब सैकड़ों किसानों को अपनी जान जोखिम में डालकर गंगा के तेज बहाव में नाव के सहारे उस पार जाना पड़ेगा।
किसानों का साफ तौर से कहना है कि गंगा में ज्यादा पानी आने के कारण अस्थाई पुल बह गया है। लेकिन किसानों को खेती करने के लिए अब नाव के सहारे उस पार जाना पड़ेगा। अगर किसान सड़क के रास्ते जाता है तो उसे 60 किलोमीटर का सड़क यात्रा तय करनी पड़ेगी।जिसके कारण किसान नाव से गंगा के उस पार जाने को मजबूर है।
कई बार गंगा उफान पर होने पर नाव से खेती करने जाने वाले किसान गंगा में नाव डूबने की वजह से बह भी गए हैं। लेकिन उसके बावजूद भी जिला प्रशासन द्वारा इस अस्थाई पुल के ही सहारे किसान खेती करने के लिए जा रहा था।उधर इस पुल से गुजरने वाले लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद भी आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है।इस पुल को अस्थाई तौर पर दिवाली के बाद लोगों के आवागमन के लिए बनाया गया था। लेकिन गंगा के के तेज बहाव से इस फूल का आधा हिस्सा बह गया है। इससे 2 साल पहले गंगा के तेज बहाव में नाव के डूबने से 20 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। लेकिन इसके बावजूद भी प्रशासन प्रशासन द्वारा अभी तक स्थाई पुल का निर्माण नहीं कराया गया है।


बाइट दीप चंद

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